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क्या एसटीआई बांझपन के लक्षण पैदा कर सकता है?
हाँ, एसटीआई (Sexually Transmitted Infections) बांझपन या इनफर्टिलिटी का एक प्रमुख लेकिन “साइलेंट” कारण हो सकते हैं। कई मामलों में संक्रमण के कोई बाहरी लक्षण नहीं दिखते, जिससे इलाज में देरी होती है और प्रजनन अंगों को स्थायी नुकसान पहुँच सकता है। एसटीआई और बांझपन: क्या है संबंध? जब एसटीआई (विशेषकर क्लैमिडिया और गोनोरिया) का इलाज नहीं किया जाता, तो संक्रमण प्रजनन अंगों में ऊपर की ओर फैल सकता है। · महिलाओं में: यह पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID) का कारण बनता है। इससे फैलोपियन ट्यूब में स्कारिंग (घाव) हो सकती है, जिससे अंडे और स्पर्म का मिलन रुक जाता है। · पुरुषों में: यह एपिडिडिमिस (epididymis) में सूजन पैदा कर सकता है, जिससे स्पर्म की गुणवत्ता कम हो सकती है या स्पर्म के मार्ग में रुकावट आ सकती है। कौन से एसटीआई बांझपन का सबसे अधिक कारण बनते हैं? क्लैमिडिया (Chlamydia) और गोनोरिया (Gonorrhea) इसके सबसे बड़े अपराधी हैं। इन्हें अक्सर “साइलेंट” संक्रमण कहा जाता है क्योंकि 70-80% महिलाओं और कई पुरुषों में इनके कोई लक्षण नहीं दिखते। क्या इलाज के बाद भी बांझपन का खतरा रहता है? अगर संक्रमण का इलाज जल्दी कर लिया जाए, तो बांझपन से बचा जा सकता है। हालांकि, अगर संक्रमण ने फैलोपियन ट्यूब या प्रजनन अंगों को पहले ही डैमेज (Scarring) कर दिया है, तो एंटीबायोटिक दवाओं से संक्रमण तो ठीक हो जाएगा, लेकिन शारीरिक नुकसान (बांझपन) को ठीक करना मुश्किल हो सकता है। “साइलेंट इन्फेक्शन” के चेतावनी संकेत क्या हैं? भले ही लक्षण हल्के हों, लेकिन इन पर ध्यान देना जरूरी है: · पेशाब करते समय जलन या दर्द। · असामान्य डिस्चार्ज (रंग या गंध में बदलाव)। · इंटरकोर्स के दौरान दर्द। · पेट के निचले हिस्से (Pelvis) में पुराना दर्द। क्या पुरुष बांझपन भी एसटीआई से जुड़ा है?…
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