क्या ज़्यादा या कम वज़न होने से महिलाओं में इनफर्टिलिटी हो सकती है?

जी हाँ, बिल्कुल। वजन का प्रजनन क्षमता (Fertility) से बहुत गहरा संबंध है। चाहे वजन सामान्य से बहुत कम हो या बहुत अधिक, दोनों ही स्थितियां शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकती हैं, जिससे गर्भधारण करने में समस्या आती है।
क्या अधिक वजन (Overweight) फर्टिलिटी को प्रभावित करता है?
हाँ, अधिक वजन होने से शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है।
· हार्मोनल असंतुलन: शरीर में जमा अतिरिक्त फैट (Fat cells) अधिक एस्ट्रोजन पैदा करते हैं, जो शरीर को यह संकेत देता है कि आप पहले से गर्भवती हैं या ओव्यूलेशन की जरूरत नहीं है।
· PCOS का खतरा: मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में ‘पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम’ (PCOS) होने की संभावना अधिक होती है, जो इनफर्टिलिटी का एक मुख्य कारण है।
· इन्सुलिन रेजिस्टेंस: अधिक वजन से शरीर में इन्सुलिन का स्तर बढ़ता है, जिससे ओवरीज़ (अंडाशय) सही समय पर अंडे रिलीज नहीं कर पातीं।
क्या कम वजन (Underweight) होने से भी समस्या होती है?
जी हाँ, कम वजन होना भी उतना ही चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
· ओव्यूलेशन का रुकना: यदि शरीर में फैट की मात्रा बहुत कम है, तो मस्तिष्क ‘GnRH’ जैसे महत्वपूर्ण हार्मोन बनाना कम कर देता है। इसके बिना शरीर ओव्यूलेट (अंडा बनाना) नहीं कर पाता।
· पीरियड्स की अनियमितता: वजन बहुत कम होने पर पीरियड्स रुक सकते हैं (Amenorrhea) या अनियमित हो सकते हैं, जिससे गर्भधारण करना लगभग असंभव हो जाता है।
BMI और फर्टिलिटी का क्या कनेक्शन है?
डॉक्टर अक्सर प्रजनन क्षमता को मापने के लिए Body Mass Index (BMI) का सहारा लेते हैं:
· आदर्श BMI: 18.5 से 24.9 के बीच। इस रेंज में गर्भधारण की संभावना सबसे अधिक होती है।
· कम BMI (18.5 से नीचे): हार्मोन उत्पादन में कमी और ओव्यूलेशन की समस्या।
· अधिक BMI (25 से ऊपर): हार्मोनल असंतुलन और गर्भपात (Miscarriage) का अधिक जोखिम।
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